कई दिनों से झंझारपुर रेलवे स्टेशन पर लगातार यह शिकायतें आ रही थीं कि आम लोग जो सुबह 4 बजे से लाइन में लगते हैं, उन्हें यह कहकर लौटा दिया जाता है कि "टिकट फुल हो गया है" — जबकि उन्हीं ट्रेनों में कुछ खास लोग आसानी से टिकट पा जाते हैं।
आखिर कैसे?
जनता को साफ-साफ यह महसूस हो रहा है कि रेलवे टिकट काउंटर पर बैठे कर्मचारी और RPF के कुछ लोग आपसी मिलीभगत कर एजेंटों को टिकट उपलब्ध करा रहे हैं और दलाली का खेल खुलेआम चल रहा है।
🚨 मिथिला सेना ने अब इस विषय को गंभीरता से लिया है।
👉 हमने रेलवे विभाग को सूचना का अधिकार (RTI) के तहत आवेदन देकर यह मांग की है कि—
पिछले 5 दिनों में झंझारपुर रेलवे स्टेशन से कितने टिकट काटे गए?
टिकट कटवाने वालों के नाम, यात्रा की तारीख, गंतव्य, PNR नंबर और मोबाइल नंबर क्या हैं?
कितने टिकट स्टेशन से सीधे कटे और कितने एजेंट या ऑनलाइन माध्यम से हुए?
CCTV फुटेज और दलाली की संभावना की जांच होनी चाहिए।
यह सिर्फ RTI नहीं है — यह जनता के अधिकार की लड़ाई है।
हमारा उद्देश्य किसी कर्मचारी को बदनाम करना नहीं, बल्कि व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है।
अगर रेलवे ईमानदारी से इस RTI का जवाब देता है और सच्चाई सामने आती है, तो यह मिथिला की जनता के लिए एक बड़ी जीत होगी।
यह शुरुआत है। मिथिला सेना हर उस भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ खड़ी रहेगी जो जनता के अधिकार को छीनती है।
आपसे भी आग्रह है —
📩 यदि आपने कभी झंझारपुर स्टेशन या किसी और जगह पर टिकट दलाली होते देखा है, तो हमें जरूर बताएं।
जनता जागेगी, व्यवस्था बदलेगी।
जय मिथिला 🚩
– गुलशन झा
संस्थापक, मिथिला सेना
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