“तुझसे कुछ नहीं होगा।”
लेकिन राजू हर बार और ज्यादा मेहनत करता।
चौथी बार उसने परीक्षा टॉप की।
आज वही लोग कहते हैं—
“राजू से सीखो।”
सीख:
असफलता अंत नहीं, शुरुआत होती है।
मिथिला के संस्कृति के संरक्षण हमर सबहक कर्तव्य अछि। कला स ल कए भाषा, पावनि स ल कए परम्परा तक एहि समृद्ध धरोहर कए आगामी पीढ़ी लेल सुरक्षित रखबाक चाही।
13 नवंबर की यह तस्वीर सिर्फ एक फोटो नहीं, बल्कि दो दोस्तों की ज़िंदगी की दो अलग-अलग राहों का खूबसूरत साक्ष्य है। समय बदलता है, आदतें बदलती ह...