पढ़ाई हो, काम हो या रिश्ते—सब कुछ कल पर छोड़ देता।
एक दिन उसकी नौकरी चली गई।
तब उसे समझ आया कि जो समय निकल गया, वह कभी वापस नहीं आता।
उस दिन से रमेश ने आज में जीना सीख लिया।
सीख:
समय की कदर करने वाला इंसान कभी खाली हाथ नहीं रहता।
मिथिला के संस्कृति के संरक्षण हमर सबहक कर्तव्य अछि। कला स ल कए भाषा, पावनि स ल कए परम्परा तक एहि समृद्ध धरोहर कए आगामी पीढ़ी लेल सुरक्षित रखबाक चाही।
13 नवंबर की यह तस्वीर सिर्फ एक फोटो नहीं, बल्कि दो दोस्तों की ज़िंदगी की दो अलग-अलग राहों का खूबसूरत साक्ष्य है। समय बदलता है, आदतें बदलती ह...
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